कृति कला एवं साहित्य परिषद के माध्यम से युवाओं को मिल रहा एक बेहतर मंच – प्रवीण झा

कृति कला एवं साहित्य परिषद के माध्यम से युवाओं को मिल रहा एक बेहतर मंच – प्रवीण झा
बिलासपुर। ब्यूरो रिपोर्ट। कृति कला एवं साहित्य समिति सीपत बिलासपुर के तत्वावधान में संस्था के 25 वी सालगिरह के उपलक्ष में रजत जयंती वर्ष के तहत, कृति साहित्य महोत्सव का आयोजन देवकीनंदन दीक्षित सभागार में श्री प्रवीण झा जी -उद्योगपति एवं समाजसेवी के मुख्य आतिथ्य, डॉ. ओम माखीजा जी की अध्यक्षता एवं डॉ. विनय कुमार पाठक कुलपति थावे विद्यापीठ गोपालगंज बिहार, छत्तीसगढ़ के रसखान श्री मीर अली मीर जी वरिष्ठ साहित्यकार रायपुर, डॉ. सोमनाथ यादव जी संस्थापक बिलासा कला मंच, पीसी लाल यादव, प्रो. डॉ. रामनारायण ध्रुव जी वरिष्ठ लोककलाकार, प्रो. डॉ. अमृत लाल ध्रुवंशी जी वरिष्ठ लोककलाकार, जी वरिष्ठ साहित्यकार, के विशिष्ट आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के तैल चित्र पर पूजन अर्चन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, सरस्वती वंदना की प्रस्तुति की उर्वशी मिश्रा ने दी तत्पश्चात राजगीत की प्रस्तुति छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध कवयित्री सोमप्रभा नूर एवं पूर्णिमा चौधरी जी द्वारा दी गई। समिति के गौरवमयी परंपरानुसार सभी अतिथियों को पारिवारिक पगड़ी पहनाकर परंपरा का निर्वहन किया गया । संस्था के प्रांतीय अध्यक्ष श्री शरद यादव ने स्वागत भाषण एवं संस्था के क्रियाकलापों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर मुख्य अभ्यागत श्री प्रवीण झा ने कहां कि साहित्य समाज का दर्पण है, हम सभी को इसके संरक्षण व संवर्धन हेतु तन मन और धन से सेवा करनी चाहिए, तभी समाज को अच्छे रचनाकार मिलेंगे,उन्होंने आगे कहा कृति कला एवं साहित्य परिषद के माध्यम से युवाओं को मिल रहा एक बेहतर मंच, डा. विनय कुमार पाठक ने आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि पूरे प्रांत के विभिन्न जिलों से पहुंचे साहित्यकारों की उपस्थिति से ये साहित्यिक कुंभ जैसा प्रतीत हो रहा है, डॉ. सोमनाथ यादव ने रचनाकारों को अपनी लेखनी में संयम रखते हुए, त्रुटियों पे काम करने की बात कही, प्रो. ध्रुवंशी ने आयोजन की भव्यता की सराहना की, तो वहीं प्रो रामनारायण ध्रुव ने ऐसे आयोजन प्रतिवर्ष करने की बात कही, आयोजन के अध्यक्ष डॉ. ओम मखीजा ने कहां कि साहित्यकार अपनी लेखनी से समाज को एक नई दिशा देते है, जिससे समाज में सकारात्मक चेतना जाग्रत होती है, श्री मीर अली मीर जी ने रचनाकारों को लिखने और मंच पे उसके प्रस्तुतीकरण की बारीकियों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का सफल संचालन शशि भूषण स्नेही, बालमुकुंद श्रीवास, सोमप्रभा तिवारी एवं पूर्णिमा चौधरी ने एवं आभार प्रदर्शन संस्था के प्रांतीय अध्यक्ष श्री शरद यादव ने किया। प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोक कलाकारों साहित्यकारों एवं चिकित्सकों का सम्मान किया गया जिसमे लोक गायक नीलकमल वैष्णव एवं लोकगायिका शिवानी वैष्णव का कृति कला सम्मान, साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए कृति साहित्य सम्मान मनीराम साहू “मितान”, काव्य वाटिका समिति रायगढ़, मैत्री साहित्यिक समिति छत्तीसगढ़ को ‘कृति साहित्य वृंद सम्मान’ एवं चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले नगर के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. रजनीश पांडेय जी, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. स्मिता कश्यप जी का कृति नवजीवन सम्मान 2026 से सम्मानित किया गया।

आयोजन में 164 रचनाकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया जिसमें उत्कृष्ट काव्यपाठ करने वाले दो रचनाकार श्रीमती कविता जैन “कुहुक” एवं ओमवीर करण भिलाई को कृति सारस्वत सम्मान 2026 से सम्मानित किया गया, इस प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका श्री संतोष कश्यप, डा. विश्वनाथ कश्यप एवं डॉ. राजेंद्र वर्मा ने निभाई।
10 कृतियों का हुआ विमोचन
आयोजन में प्रतिष्ठित “एहसास पत्रिका” के साथ ही साथ, जीवन है एक नदी, रेगिस्तान का राही, बालकथा कल्याणी, रुचि दोहावली, माई डियर फादर, पटझड़ का मौसम, लुकाछिपी, बालमन, दाई के सुरता कृतियों का भी विमोचन किया गया। आयोजन में सुरेश पैगवार, डॉ. रश्मि लता मिश्रा, नीलिमा यादव, हेमंत, सचिन विश्वकर्मा, जितेंद्र वर्मा, मिलन मल्हरिया, ज्योति श्रीवास, पूर्णिमा चौधरी, इरशाद कुरैशी, हरमीत रौनक, शशि भूषण स्नेही, अरविंद सोनी, निर्मल गुप्ता, लोक नाथ टांडे, आदित्य बर्मन, शीतल पाटनवार, एम डी. मानिकपुरी, राघवेंद्र दुबे, गौरव साहू, संतोष वैष्णव, अरविंद सोनी, अजय पटनायक, तेज राम नायक, सत्यनारायण तिवारी, पूर्णिमा तिवारी, मीरा मृदु, निवेदिता वर्मा, बी. एल. नागवंशी, दीनदयाल यादव, सुधा देवांगन, आशा मेहर, कृष्णा भारती सेन, रचना पाल, डा. सुकमोती चौहान, उर्वशी मिश्रा, द्रोपदी साहू, सरस्वती साहू, आशा चंद्राकर, शोभा त्रिपाठी, राजेश सोनार साथ ही छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों कोरबा, मुंगेली, जांजगीर, रायगढ़, जशपुर, बेमेतरा, कवर्धा, रायपुर, दुर्ग, भाटापारा, इत्यादि 16 जिलों से रचनाकार बड़ी संख्या में उपस्थित थे।



