भालेराव मैदान में गूंजी सांचिन की धूम, 10 दिवसीय कराते प्रशिक्षण शिविर का भव्य समापन,,

भालेराव मैदान में गूंजी सांचिन की धूम, 10 दिवसीय कराते प्रशिक्षण शिविर का भव्य समापन
जांजगीर चाम्पा। ब्यूरो रिपोर्ट। स्वस्थ तन, स्वस्थ मन के शाश्वत मंत्र को आत्मसात करते हुए चांपा नगर में आयोजित 10 दिवसीय कराते प्रशिक्षण शिविर का भव्य समापन हुआ। स्थानीय ऐतिहासिक भालेराव मैदान में 1 मई से 10 मई 2026 तक चले इस विशेष प्रशिक्षण शिविर में चांपा सहित अटल बिहारी वाजपेयी मड़वा पावर प्लांट क्षेत्र के लगभग 40 प्रशिक्षणार्थियों ने हिस्सा लिया।

ऑल मार्शल आर्ट कराते डीओ फेडरेशन छत्तीसगढ़ के सिंहान राजेंद्र कुमार वर्मा (7 डान ब्लैक बेल्ट) एवं विनोद तिवारी “महाराज ज्वेलर्स” (6 डान ब्लैक बेल्ट) के नेतृत्व में आयोजित इस शिविर में विशाखापत्तनम से विशेष रूप से पहुंचे रेड बेल्ट प्रशिक्षक कैलाश सिंह ने प्रतिभागियों को कराते की विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान सांचिन, सेइसान, तेंशो, सैफा, कुरुनफा, शिसोचिन, सेइचान सहित रक्षात्मक एवं आक्रामक विशेष काटा की बारीकियां सिखाई गईं।

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य आत्मरक्षा के साथ-साथ मानसिक संतुलन, आत्मानुशासन और कठिन परिस्थितियों में आंतरिक ऊर्जा को नियंत्रित करने की क्षमता विकसित करना रहा। प्रशिक्षकों ने बताया कि कराते केवल शारीरिक मजबूती का माध्यम नहीं बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और आत्मचरित्र के सर्वांगीण विकास का भी महत्वपूर्ण साधन है।

प्रशिक्षण शिविर के दौरान कराते संघ के अध्यक्ष डॉ. अतुल राठौर, श्रीमती वीणा साहू सहित कई गणमान्य अतिथियों ने उपस्थित होकर प्रशिक्षणार्थियों का उत्साहवर्धन किया। समापन समारोह में वरिष्ठ कराते खिलाड़ी एवं कराते संघ के संरक्षक मनोज मित्तल, स्वादम कैफे के संचालक सुनील वनकर, वरिष्ठ पत्रकार शशिभूषण सोनी, श्रीदास जी, नवनीत शर्मा, विशाल केडिया (वाइस प्रेसिडेंट कराते संघ) तथा गोपी राठौर ने विभिन्न आयु वर्ग के प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए।

विशेष आमंत्रित प्रशिक्षक कैलाश सिंह को कौसेय वस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं इस अवसर पर विनोद तिवारी को 6 डान ब्लैक बेल्ट, मंजू महंत को 1 डान ब्लैक बेल्ट, अखिलेश देवांगन, संगीता महंत एवं तीजराम जांगड़े को ब्लैक बेल्ट की उपाधि प्रदान की गई।

आयोजन को सफल बनाने में राजेंद्र वर्मा, विनोद तिवारी, तीजराम जांगड़े, मंजू महंत एवं ओम राठौर का विशेष योगदान और सतत मार्गदर्शन रहा।



