डॉ राम विजय शर्मा ने भगवान करिया धरवा पर किया विस्तृत शोध,,

डॉ राम विजय शर्मा ने भगवान करिया धरवा पर किया विस्तृत शोध
अर्जुनी (पिथौरा)।रिपोर्ट कृष्णा टण्डन। विगत दिनों डॉ रामविजय शर्मा इतिहासकार एवं पुरातत्ववेता रायपुर भारत नें अर्जुनी में एक शोध कैंप का आयोजन कर कौडिया जमीदारी के लोक देवता भगवान करिया धवा पर शोध किया। भगवान करिया धरवा कौडिया राज के राज परिवार के तिसरी पोढ़ी में थे उनका विवाह रतनपुर राज के राजकुमारी देवी कुवर के साथ तय हुई वे बारात लेकर रतनपुर गये और शादी विवाह के पश्चात अपने गांव लौट रह थे। जब वे अर्जुनी गांव में पहुंचें तब तक सवेरा हो गया और पुरी बारात पत्थर के मूर्ति के रूप में बदल गयी। यह घटना उस समय की है जब छहमासी दिन और छहमासी रात होता था। अर्जुनी में तालाब के किनारे करिया धरवा जी एवं पुरूष बाराती पत्थर की मूर्ति के रूप में परिवर्तित हो गये तथा थोडी दुरी पर करिया धुरवाईन माता महिला सहेलियों के साथ पत्थर की मूर्ति के रूप में परिवर्तित हो गये। करिया धुरवा जी कौडिया राज्य (जमीदारी) के 179 गांव के मालिक थें कौडिया जमीदारी में 52 तालाब तथा 180 कुआ था। उनके राज्य में शांति समृध्दि व्याप्त थी तथा लोग धार्मिक प्रवृत्ति के थे तथा धर्म के कार्यों में लगे रहते थे मारकाट तथा चारी डकैति नहीं होती थी करिया धुरवा जी ने सिचाई की अच्छी व्यवस्था की थी जिससे कृषि अच्छी होती थी और किसान खुशहाल थे। अर्जुनी ग्राम पिथौरा तहसील जिला महासमुंद के अंतर्गत एक प्राचीन गांव है जो मुढ़ीपार ग्राम पंचायत के अतगत स्थित है तथा पिथौरा से 3 कि.मी. की दूरी पर है शोध आगे भी जारी है। गांव के लोगो को पता चला कि भगवान करिया धवा बहुत शक्तिशाली है। तब 21 गांव के लोगो ने चंदा करके भगवान करिया घुरवा का मंदिर बनवाया। इसी तरह भगवती करिया घुरवाईन माता का मंदिर भी बनाया जा रहा है। पहले मूर्तिया एक चबुतरे पर स्थापित थी। भगवान करिया धुरवा के मंदिर में मन्नत मांगने पर संतान की प्राप्ति होती है तथा अन्य मनोकामना पूरी होती है। मन्नत पूरी होने पर भक्त लोग भगवान करिया घुरवा को काले बकरे की तथा भगवती करिया धुरवाईन को काली बकरी की बली देते है। मेला अगहन पूर्णिमा के अवसर पर लगता है तथा 3 दिवस का रहता है जिसमें रात्री में राउत नाचा, सुआ नृत्य तथा गम्मत भी होता है।

शोध कैंप में पूर्व जनपद सदस्य तोरण बैरागी बागबाहरा, पूर्व सरपंच प्रदोप पटेल मुढ़ीपार, रण सिंह ध्रुव, राजपरिवार का सचिव, गणेश राम ध्रुव, प्रमुख बैगा सोनु राम ध्रुव, बैगा तुला राम विश्वकर्मा, देवनारायण पटेल, रूपसिंह धव, झनकराम पटेल, प्रेमशंकर पटेल अध्यक्ष, राम दास मानिकपूरी सहित ग्रामीण जन उपस्थित रह कर शोध कैंप को सफल बनायें।




