रायपुर

प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज (साहित्य प्रकोष्ठ) में प्रदेश पदाधिकारियों का मनोनयन

रायपुर। प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज द्वारा साहित्यकारों की आवश्यक बैठक 30 अगस्त 2025, शनिवार को गुरु घासीदास सांस्कृतिक भवन, न्यू राजेन्द्र नगर, रायपुर में सम्पन्न हुई। प्रदेश के विभिन्न जिलों से साहित्यकारों की उपस्थिति में यह बैठक प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के प्रदेशाध्यक्ष श्री एल.एल. कोशले के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। बैठक का शुभारंभ परमपूज्य गुरु घासीदास बाबाजी की पूजा-अर्चना से हुआ। बैठक में सतनाम संदेश पत्रिका के संपादक मंडल के सदस्य साहित्यकार मंगत रविन्द्र, हरप्रसाद निडर, डॉ. स्वामीराम बंजारे, डॉ. आर.पी. टंडन, एस.आर. बांधे सहित साहित्यकार एस आर बंजारे, राजमहन्त पी एल कोसरिया, वेदानन्द दिब्य, भुवन दास कोसरिया, राकेश नारायण बंजारे, अश्विनी रात्रे, निशा ओगरे, गुलाबदास टंडन, बी एल कुर्रे, मोहन लाल डहरिया उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रदेश कोषाध्यक्ष श्याम तांडे, कृष्ण कोशले, मनोज खरे, नोहर धिरही, आनंद लहरे, मैना देवी मांडले भी शामिल रहे।

बैठक में संपादक मंडल का पुनर्गठन किया गया जिसमें – संरक्षक : श्री एल.एल. कोशले, प्रबंध संपादक : डॉ. स्वामीराम बंजारे, संपादक मंडल : डॉ. अनिल भतपहरी, डॉ. रामायण प्रसाद टंडन, श्री सेवकराम बांधे, श्री राकेश नारायण बंजारे, श्रीमती निशा ओगरे शामिल किए गए  साथ ही प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज (साहित्य प्रकोष्ठ) के प्रदेश पदाधिकारियों का सर्वसम्मति से मनोनयन हुआ –

अध्यक्ष : श्री सेवकराम बांधे

उपाध्यक्ष : श्री मंगत रविन्द्र, श्री एस.एस. निराला, डॉ. दादूलाल जोशी

सचिव : डॉ. रामायण प्रसाद टंडन

प्रवक्ता : श्री राकेश नारायण बंजारे

मीडिया प्रभारी : श्री पी.एल. कोसरिया कार्यकारिणी सदस्य : श्री भुवनदास कोसरिया, श्री वेदानंद दिव्य, डॉ. कुमुदनी घृतलहरे, श्री एस.आर. बंजारे, श्री हरप्रसाद निडर, श्री बंशीलाल कुर्रे, श्री हरीश पंडाल मनोनित किए गए।

बैठक में सतनाम संदेश पत्रिका को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के संबंध पर विचार किया गया। पत्रिका में गुरु बाबा घासीदास जी का संदेश, उनके दर्शन, सामाजिक गतिविधियाँ, सतनाम सत्संग, आध्यात्म, बच्चों व महिलाओं के विकास से जुड़ी सामग्री और रोजगारोन्मुख जानकारी शामिल करने पर विशेष जोर दिया गया।

यह बैठक साहित्यकारों की सक्रिय भागीदारी और समाज की सांस्कृतिक व वैचारिक दिशा तय करने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।

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