नई दिल्ली

अरावली पर सुप्रीम कोर्ट का सुओ मोटो एक्शन, सोमवार को सीजेआई सूर्यकांत खुद करेंगे सुनवाई

अरावली पहाड़ियों को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच सोमवार को इस अहम मामले की सुनवाई करेगी. वहीं, केंद्र ने अरावली में नए माइनिंग पट्टों पर रोक लगा दी है.

नई दिल्ली: अरावली रेंज को लेकर उपजे विवाद का सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान (Suo Motu) लिया है. सोमवार को चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच इस पूरे विवाद की सुनवाई करेगी. बेंच में सीजेआई के अलावा जस्टिस जे के माहेश्वरी और जस्टिस ए जी मसीह भी रहेंगे. अरावली दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है जो करीब 700 किमी लंबी है. यह दिल्ली-एनसीआर को थार रेगिस्तान की धूल और मरुस्थलीकरण से बचाने वाली एक ‘प्राकृतिक ढाल’ है. हाल ही में सरकार की ‘100 मीटर ऊंचाई’ वाली नई परिभाषा पर भारी विवाद खड़ा हुआ था. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस नियम से अरावली का 90% हिस्सा खत्म हो सकता है. केंद्र सरकार ने हालांकि नए माइनिंग पट्टों पर रोक लगा दी है. लेकिन अब मामला देश की सबसे बड़ी अदालत के पास है. सोमवार की सुनवाई अरावली के अस्तित्व के लिए बहुत ही निर्णायक साबित हो सकती है.

अरावली को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने क्या कड़े निर्देश दिए हैं?
पर्यावरण मंत्रालय ने बुधवार को राज्यों को कड़े निर्देश जारी किए थे. अब अरावली में किसी भी नए खनन पट्टे (Mining Lease) पर रोक होगी. यह प्रतिबंध दिल्ली से गुजरात तक पूरे भूभाग पर लागू होगा. आईसीएफआरई (ICFRE) को अतिरिक्त क्षेत्रों की पहचान करने को कहा गया है. इन क्षेत्रों में भी खनन को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा. केंद्र सरकार ने अरावली की अखंडता बचाने का वादा किया है. पुरानी खदानों को भी कोर्ट के आदेशों का पालन करना होगा. सरकार का लक्ष्य अनियमित माइनिंग को पूरी तरह रोकना है. मरुस्थलीकरण रोकने के लिए अरावली का बचना बहुत जरूरी है.
भारत सरकार ने मार्च 2023 में ‘अरावली ग्रीन वॉल’ पहल शुरू की थी. इसका लक्ष्य गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में 5 किमी चौड़ा ग्रीन बेल्ट बफर बनाना है. यह प्रोजेक्ट 6.45 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करेगा ताकि मरुस्थलीकरण को रोका जा सके.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!