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शराब घोटाले मामले में चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से राहत, जमानत मंजूर

छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले मामले में कांग्रेस नेता चैतन्य बघेल को बिलासपुर हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है. हालांकि जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी रहेगी. इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और मामले को लेकर बयानबाजी शुरू हो गई है.
रायपुर / छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को बड़ी राहत मिली है. बिलासपुर हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है. इस फैसले के साथ ही राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक हलकों तक हलचल तेज हो गई है. प्रवर्तन निदेशालय और जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बीच आया यह आदेश इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह केस राज्य की राजनीति, सत्ता परिवर्तन और आर्थिक अनियमितताओं से जुड़ा रहा है. चैतन्य बघेल लंबे समय से जांच एजेंसियों के रडार पर थे और उनकी गिरफ्तारी के बाद मामला और संवेदनशील हो गया था. हाईकोर्ट की यह राहत न सिर्फ कानूनी रूप से अहम है, बल्कि इसका सीधा असर छत्तीसगढ़ की सियासत पर भी पड़ता दिख रहा है.
शराब घोटाले को लेकर पिछले कई महीनों से ईडी, आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा और अन्य एजेंसियां लगातार जांच कर रही थीं. आरोप है कि आबकारी नीति के जरिए करोड़ों रुपये का अवैध लाभ उठाया गया. इस पूरे मामले में कई कारोबारी, अधिकारी और राजनीतिक नाम सामने आए. चैतन्य बघेल का नाम आने के बाद यह केस और हाई-प्रोफाइल बन गया. जमानत मिलने के बाद कांग्रेस ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है, जबकि विपक्ष इसे न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है. हाईकोर्ट के आदेश ने फिलहाल चैतन्य बघेल को कानूनी राहत दी है, लेकिन जांच एजेंसियों की कार्रवाई और ट्रायल अभी बाकी है.
क्या है शराब घोटाला मामला
छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले की जांच पिछले कुछ वर्षों से चल रही है. आरोप है कि शराब की बिक्री, लाइसेंस और सप्लाई चेन के जरिए बड़े पैमाने पर अनियमितता की गई. इस केस में जांच एजेंसियों का दावा है कि
छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले की जांच पिछले कुछ वर्षों से चल रही है. आरोप है कि शराब की बिक्री, लाइसेंस और सप्लाई चेन के जरिए बड़े पैमाने पर अनियमितता की गई. इस केस में जांच एजेंसियों का दावा है कि
- सरकारी नीति का दुरुपयोग किया गया.
- निजी कंपनियों को अवैध फायदा पहुंचाया गया.
- कमीशन और कैश लेन-देन के जरिए काला धन खड़ा किया गया.
- यह पैसा बेनामी संपत्तियों और कारोबार में लगाया गया.
- चैतन्य बघेल पर क्या आरोप लगाए गए
- जांच एजेंसियों के अनुसार चैतन्य बघेल पर प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से वित्तीय लेन-देन में शामिल होने के आरोप हैं. एजेंसियों ने पूछताछ के दौरान कई दस्तावेज और डिजिटल सबूत जुटाने का दावा किया है. मुख्य आरोपों में शामिल हैं.
- शराब कारोबार से जुड़े लोगों से कथित संपर्क.
- संदिग्ध बैंक ट्रांजैक्शन.
- शेल कंपनियों के जरिए निवेश.
- आय से अधिक संपत्ति की जांच.
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हाईकोर्ट में जमानत पर क्या दलीलें दी गईं
हाईकोर्ट में चैतन्य बघेल की ओर से कहा गया कि.- उनके खिलाफ अभी ट्रायल शुरू नहीं हुआ है.
- सभी आरोप अनुमान और परिस्थितिजन्य हैं.
- हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है.
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वहीं जांच एजेंसियों ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि.
- मामला आर्थिक अपराध से जुड़ा है.
- सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका है.
- प्रभावशाली पृष्ठभूमि के कारण जांच प्रभावित हो सकती है.
हाईकोर्ट का आदेश और शर्तें -
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चैतन्य बघेल को जमानत देने का आदेश दिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत का अर्थ आरोपों से मुक्त होना नहीं है.
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जमानत के साथ कुछ शर्तें भी लगाई गई हैं.
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जांच में पूरा सहयोग करना होगा.
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बिना अनुमति राज्य से बाहर नहीं जाएंगे.
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गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे.
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जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसी के सामने पेश होंगे
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वह जांच में सहयोग कर चुके हैं.




