एफआईआर दर्ज नहीं, समझौते का दबाव और हाइवा छोड़ने का आरोप; एसपी से की गई शिकायत पुलिसकर्मियों के ऊपर हो कार्यवाही,,
भीम रेजीमेंट ने उठाए सवाल, दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग,,

जांजगीर : कोतवाली थाना पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप
हादसे में युवक जिंदगी और मौत से जूझता रहा, पुलिस आरोपी को बचाने में जुटी?
जांजगीर-चांपा। ब्यूरो रिपोर्ट। जिले में सड़क दुर्घटना के एक गंभीर मामले ने पुलिस कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल युवक उपचार के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पीड़ित परिवार ने कोतवाली थाना पुलिस पर आरोपी पक्ष को संरक्षण देने, एफआईआर दर्ज नहीं करने तथा समझौते का दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
ग्राम मुड़पार (खि.) निवासी देव प्रसाद लहरें ने पुलिस अधीक्षक जांजगीर-चांपा को लिखित शिकायत सौंपकर बताया है कि दिनांक 15 जून 2026 को सुबह लगभग 4 बजे नेताजी चौक, जांजगीर के पास रेत से भरे हाइवा क्रमांक CG11BM4717 ने उनके भतीजे प्रकाश लहरें को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। शिकायत के अनुसार दुर्घटना के बाद चालक मौके से भागने का प्रयास कर रहा था, लेकिन पुलिस पेट्रोलिंग टीम ने उसे पकड़ लिया और वाहन सहित थाना ले जाया गया। इसके बावजूद आरोपी चालक के विरुद्ध आज तक एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।

आरोपी पकड़ा गया, वाहन भी जब्त हुआ,,फिर एफआईआर क्यों नहीं?
पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के दिन ही सिटी कोतवाली जांजगीर में लिखित शिकायत प्रस्तुत कर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी, लेकिन अपराध दर्ज करने के बजाय कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा आरोपी से समझौता कर पैसे लेने तथा राजीनामा करने की सलाह दी गई। परिजनों का कहना है कि उन्होंने समझौते से साफ इंकार किया, इसके बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई और लगातार मामले को दबाने का प्रयास किया गया।
दो दिन बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, वाहन छोड़ने का भी आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार दिनांक 17 जून 2026 को पुनः थाना पहुंचकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई, लेकिन घंटों इंतजार कराने के बाद भी कोई वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई। इतना ही नहीं, दुर्घटना में प्रयुक्त हाइवा वाहन को भी कथित रूप से बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के छोड़ दिया गया।
भीम रेजीमेंट ने उठाया मुद्दा
मामले को गंभीर बताते हुए पीड़ित पक्ष ने भीम रेजीमेंट के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र रत्नाकर से संपर्क किया। सुरेंद्र रत्नाकर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च अधिकारियों को अवगत कराया तथा दुर्घटना प्रकरण में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी गंभीर सड़क दुर्घटना में आरोपी और वाहन दोनों पुलिस के कब्जे में होने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं होती है, तो यह न्याय व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
एसपी से निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि आरोपी चालक के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए तथा मामले में आरोपी को लाभ पहुंचाने, समझौते का दबाव बनाने और कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले संबंधित पुलिसकर्मियों की निष्पक्ष जांच कर उनके विरुद्ध सख्त विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बड़ा सवाल :- क्या जांजगीर में सड़क हादसे के पीड़ितों को न्याय पाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ेगा?
जब आरोपी चालक और दुर्घटना में प्रयुक्त वाहन पुलिस के कब्जे में थे, तो एफआईआर दर्ज करने में देरी क्यों?
क्या आरोपी को बचाने के लिए कानून से समझौता किया जा रहा था?
अब पूरे जिले की निगाहें पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।




