दादा की विरासत को पोते ने दिलाई नई पहचान: सिवनी की तंदूरी समोसा पट्टी अब कई जिलों तक पहुंच रही,,

सीएसपी योगिता बाली खापर्डे, टीआई अशोक वैष्णव सहित पुलिस टीम ने उत्पादन केंद्र का किया निरीक्षण, गुणवत्ता, स्वच्छता और स्वरोजगार मॉडल की सराहना
जांजगीर-चांपा।रिपोर्ट कृष्णा। जिले के चांपा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सिवनी के बाजार चौक निवासी युवा जितेंद्र यादव अपनी मेहनत, लगन और पारिवारिक विरासत के दम पर आज पूरे क्षेत्र में अलग पहचान बना चुके हैं। उनके यहां तैयार होने वाली तंदूरी समोसा पट्टी (रॉ मैटेरियल) की मांग लगातार बढ़ रही है। सिवनी से तैयार होकर यह पट्टी जांजगीर चांपा, कोरबा, बिलासपुर , सक्ति सहित आसपास के कई जिलों तक नियमित रूप से सप्लाई की जाती है, जहां इससे स्वादिष्ट तंदूरी समोसे तैयार कर ग्राहकों को परोसे जाते हैं और लोग भी बड़े चाव के साथ इसको खाते है। गुणवत्ता और भरोसे के कारण उनका उत्पाद बाजार में अपनी अलग पहचान बना चुका है।इसको बेचकर उनको लगभग सालाना 4 लाख रुपए की अच्छी आमदनी होती है।

जितेंद्र यादव के इस सफल उत्पादन व्यवस्था को देखने तथा उनका उत्साहवर्धन करने के लिए जांजगीर सीएसपी योगिता बाली खापर्डे एवं चांपा थाना प्रभारी अशोक वैष्णव उनके उत्पादन केंद्र पहुंचे। इस दौरान प्रशिक्षु उप निरीक्षक निकिता साहू, रुकसाना बानो एवं गोपी राजपूत भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने तंदूरी समोसा पट्टी के निर्माण की पूरी प्रक्रिया, उपयोग किए जाने वाले रॉ मैटेरियल, स्वच्छता, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग और उत्पादन प्रणाली का बारीकी से निरीक्षण किया। अधिकारियों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के नवाचार और स्वरोजगार के प्रयास न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि अन्य युवाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देते हैं।

जितेंद्र यादव ने बताया कि यह केवल उनका व्यवसाय नहीं, बल्कि उनके परिवार की कई दशक पुरानी विरासत है। उनके परम पूजनीय दादाजी स्वर्गीय फिरतराम यादव ने तंदूरी समोसा पट्टी निर्माण का कार्य शुरू किया था। इसके बाद परिवार की दूसरी पीढ़ी ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया और अब तीसरी पीढ़ी के रूप में वे आधुनिक तकनीक, बेहतर गुणवत्ता, स्वच्छ उत्पादन व्यवस्था और नई व्यावसायिक सोच के साथ इस विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। बढ़ती मांग के कारण आज उनका उत्पाद कई जिलों में नियमित रूप से पहुंच रहा है और स्थानीय स्तर पर इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
विरासत की पहचान,,,तंदूरी समोसा,
लगभग 100 साल पहले चांपा रेलवे स्टेशन के पास से दादा जी ने इसको बनाना प्रारंभ किया फिर तंदूरी समोसा पट्टी निर्माण का कार्य आज भी हमारी पहचान और हमारी विरासत का अभिन्न हिस्सा है। कई दशकों से यह परंपरा निरंतर आगे बढ़ती आ रही है। आज तीसरी पीढ़ी के रूप में हम इस विरासत को आधुनिक तकनीकों, नवीन सोच और बेहतर गुणवत्ता के साथ आगे बढ़ाने का सतत प्रयास कर रहे हैं।”
,,जितेंद्र यादव, युवा व्यवसायी
मेहनत, गुणवत्ता और ईमानदारी से किया गया कार्य हमेशा सफलता दिलाता है। जितेंद्र यादव ने अपनी पारिवारिक विरासत को आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ाकर यह साबित किया है कि गांव से भी बड़ा और सफल उद्योग खड़ा किया जा सकता है। ऐसे युवा समाज के लिए प्रेरणा हैं और आत्मनिर्भर भारत के सशक्त उदाहरण भी।”
वर्सन – अशोक वैष्णव, थाना प्रभारी, चांपा




