MSTC आनलाइन प्रक्रियाओं से होगी अब छत्तीसगढ़ में रेतखदानों की निलामी …

संवाददाता – लोकनाथ साहू / मनमोहन
जांजगीर चांपा :- आखिरकार नई रेत नीति के तहत रेत खदानों की नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रायगढ़ के पांच रेतघाटों की फाइल एमएसटीसी पोर्टल पर अपलोड कर दी गई हैं। पहले चरण में कुल पांच रेतघाटों को नीलामी के लिए प्रस्तुत किया गया है। इसके लिए आवेदन 31 अक्टूबर से 6 नवंबर तक किए जाएंगे। रेत की किल्लत से दो-चार हो रहे रायगढ़ को पांच साल बाद नई वैध रेत खदानें मिल जाएंगी। उम्मीद है कि एमएसटीसी पोर्टल के जरिए हो रही नीलामी में नए रेत खदानों का आवंटन हो जाएगा।छग सरकार ने पुरानी मैन्युअल प्रक्रिया को विदा करते हुए सबकुछ ऑनलाईन कर दिया है। रेतघाटों की जानकारी से लेकर बिड, लॉटरी सबकुछ एमएसटीसी पोर्टल के जरिए करने का निर्णय लिया है। केवल छग के मूल निवासी ही इसमें भाग ले सकेंगे। नियम के मुताबिक एक बोलीदार को एक जिले में केवल एक और प्रदेश में कुल पांच रेत खदानें ही मिल सकेंगी। पहले चरण की नीलामी शुरू करने के लिए सभी जिलों को रेतघाटों की फाइल तैयार कर अपलोड करने को कहा गया था।
रायगढ़ जिले से बरभौना (खरसिया), बायसी (धरमजयगढ़), कंचनपुर (घरघोड़ा), लेबड़ा (रायगढ़) और पुसल्दा (छाल) को इलेक्ट्रॉनिक नीलामी के लिए प्रस्तुत किया गया है। नीलामी रिवर्स ऑक्शन के जरिए होगी जिसमें न्यूनतम बोलीदार को खदान का आवंटन किया जाएगा। एक से अधिक बोलीदारों के एकसमान रेट डालने पर लॉटरी के जरिए ही निर्णय होगा जो ऑनलाईन होगा। केवल बिडर्स के दस्तावेजों का सत्यापन मैन्युअली होगा। इन पांचों रेतघाटों के लिए एमएसटीसी पोर्टल में 31 अक्टूबर से 6 नवंबर शाम 5.30 बजे तक तकनीकी और वित्तीय बोली जमा की जा सकेगी।
बायसी है सबसे बड़ी रेत खदान
इस बार रेत खदान नीलामी के सारे नियम बदल चुके हैं। बेस प्राइस से लेकर बोली प्रतिभूति राशि तक सबकुछ पहले की तुलना में अधिक है। पांचों रेतघाटों में सबसे ज्यादा क्षेत्रफल बायसी का 5 हेक्टेयर है। इसके बाद बरभौना 4 हे., पुसल्दा 4 हे., लेबड़ा 2.5 हे. और कंचनपुर 2 हे. है। खनिज विभाग ने रेत खदानों की सूची के साथ सारे नियम सार्वजनिक किए हैं। बोलीदार को मूल निवासी प्रमाण पत्र के अलावा पैन कार्ड, आधार कार्ड, एफिडेविट, फर्म होने पर पावर ऑफ अटॉर्नी आदि देना होगा।
7 नवंबर को होगी घोषणा
इलेक्ट्रॉनिक नीलामी के लिए 6 नवंबर तक बिडिंग की जाएगी। 7 नवंबर को रिवर्स ऑक्शन खोलकर तकनीकी रूप से पात्र बोलीदारों का चयन होगा। इसके बाद वित्तीय बोली ओपन की जाएगी। न्यूनतम बोली वाले को अधिमानी बोलीदार घोषित किया जाएगा। इसके बाद खदान के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति लेने आवेदन करना होगा।
संवाददाता – लोकनाथ साहू
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