छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के प्रांतीय सम्मेलन में जांजगीर जिले के साहित्यकारों ने बिखेरी छत्तीसगढ़ी साहित्य की खुशबू

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के प्रांतीय सम्मेलन में जांजगीर जिले के साहित्यकारों ने बिखेरी छत्तीसगढ़ी साहित्य की खुशबू
बेमेतरा। ब्यूरो रिपोर्ट। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा आयोजित प्रांतीय सम्मेलन 2026 में जांजगीर जिले के साहित्यकारों ने सहभागिता करते हुए छत्तीसगढ़ी भाषा एवं साहित्य को समृद्ध करने का संदेश दिया। सम्मेलन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे साहित्यकारों एवं कवियों ने अपनी प्रतिनिधि रचनाओं का छत्तीसगढ़ी भाषा में वाचन कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
इस अवसर पर जिला समन्वयक सुरेश पैगवार, वरिष्ठ कवि संतोष कश्यप जांजगीर, युवा कवि उमाकांत टैगोर, आचार्य डॉ. सुखदेव प्रधान ‘सबरस’ बाराद्वार, डॉ. यशवंत यश सूर्यवंशी, कवयित्री पुनीता दरीयाना तथा दशरथ मतवाले सहित जांजगीर जिले के साहित्यकारों की विशेष उपस्थिति रही।
सम्मेलन में साहित्यकारों ने छत्तीसगढ़ की लोकभाषा, संस्कृति, परंपरा और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी अपनी रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। कवियों की प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ी माटी की खुशबू, लोकजीवन और जनभावनाओं की झलक देखने को मिली।
साहित्यकारों ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा हमारी संस्कृति और पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे प्रांतीय सम्मेलनों के माध्यम से साहित्यकारों को अपनी रचनाएं प्रस्तुत करने का मंच मिलता है और नई पीढ़ी को मातृभाषा एवं स्थानीय साहित्य से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।
जांजगीर जिले से साहित्यकारों की उल्लेखनीय भागीदारी ने सम्मेलन में जिले की साहित्यिक पहचान को भी मजबूती प्रदान की।




