क्या हादसे के बाद जागेगा स्थानीय प्रशासन,अस्थाई फटाका दुकानों पर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल,,
60 अस्थायी दुकानें तैयार, एसडीएम और सीएमओ के आश्वासन के बावजूद कार्रवाई का इंतजार; अब कलेक्टर से संज्ञान लेने की मांग,,

क्या हादसे के बाद जागेगा स्थानीय प्रशासन,अस्थाई फटाका दुकानों पर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल,,
60 अस्थायी दुकानें तैयार, एसडीएम और सीएमओ के आश्वासन के बावजूद कार्रवाई का इंतजार; अब कलेक्टर से संज्ञान लेने की मांग
जांजगीर चांपा। रिपोर्ट कृष्णा टण्डन। जिले के चांपा के भालेराय मैदान में दीपावली के मद्देनजर सज रहे पटाखा बाजार में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मैदान में करीब 60 अस्थायी दुकानें तैयार की जा रही हैं, लेकिन दुकानों के बीच पर्याप्त दूरी और आग से बचाव के इंतजामों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कई दुकानों को एक-दूसरे से सटाकर बनाया जा रहा है, वहीं निर्माण में तिरपाल जैसी सामग्री का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। ऐसे में आगजनी की स्थिति में बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस मामले को लेकर आज एक बार फिर चाम्पा एसडीएम शशि चौधरी से टेलीफोन पर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि अभी तक किसी भी दुकान संचालक को दुकान लगाने की अनुमति नहीं दी गई है। नियमों और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन होने के बाद ही अनुमति देने की बात कही गई। इससे पहले भी एसडीएम का कहना था कि इस व्यवस्था की निगरानी के लिए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है और संबंधित अधिकारी नियमों का पालन नहीं होने पर कार्रवाई करेंगे। वहीं नगर पालिका चांपा सीएमओ शीतल चंद्रवंशी ने भी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब स्थानीय प्रशासन को पूरे मामले की जानकारी है, संबंधित अधिकारियों से चर्चा भी हो चुकी है और सुरक्षा को लेकर लगातार आशंकाएं जताई जा रही हैं, तो फिर मौके पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नजर नहीं आ रही? आखिर अधिकारी नियुक्त करने और कार्रवाई का आश्वासन देने भर से जिम्मेदारी पूरी हो जाती है? क्या प्रशासनिक निगरानी केवल कागजों और बयानों तक सीमित है?
यदि स्थानीय प्रशासन इस मामले में गंभीरता से संज्ञान नहीं ले रहा है, तो अब जिले के कलेक्टर को तत्काल हस्तक्षेप करने की जरूरत है। पटाखा बाजार में बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होगी। ऐसे में सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी बड़े हादसे की वजह बन सकती है। प्रशासन को हादसे के बाद जवाबदेही तय करने के बजाय पहले ही व्यवस्था दुरुस्त करानी चाहिए। सवाल साफ है क्या प्रशासन किसी अप्रिय घटना का इंतजार कर रहा है?



